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10 January, 2012

कुछ खास नहीं कहने को है

कुछ खास नहीं कहने को है

फिर भी मन में बेचैनी है

जो दीप शिखर पर है जलती

उस पर निगाह मेरी पैनी है

संघर्ष तिमिर से नहीं मेरी

मैं तो हूँ भोर का उजियाला

मैं अदृश्य सूत्र अकिंचन हूँ

जिसमे गुथी है जीवन माला

मैं राह भी हूँ और राही भी

मैं कागज़ कलम और स्याही भी

मैं कविता भी और कवि भी हूँ

मैं उस ईश्वर की छवि ही हूँ

सृजन भी मैं विनाश भी हूँ

धरती भी मैं आकाश भी हूँ

जो बीज़ से उत्पन्न हो जंगल

उस बीज़ का दृढ विश्वास भी हूँ

मैं तांडव हूँ मैं रास भी हूँ

मैं वृन्दावन कैलाश भी हूँ

सागर भी मिटा न सके जिसे

अभिव्यक्ति की वो प्यास भी हूँ............

जो परिवर्तन का नीव रखे वैसा मैं क्रांतिकारी हू


हर बीज़ के मर मिटने का सवब

अंकुर की गाथा होती है

एक अरण्य की उज्जवल भविष्य

उस तुच्छ बीज़ में सोती है

जब मौन शब्द पा जाता है

और भावों को मिलती है उड़ान

जब कोयले की कालिख परे

हो प्रकट हीरों की खान

जब अंदर की संगीत नाद

हर ले बाहर का कोलाहल

जब वर्तमान की बेदी पर

सूरज की रौशनी पड़े प्रबल

मैं उस सूरज की सत्ता का एक मात्र पुजारी हूँ

जो परिवर्तन का नीव रखे वैसा मैं क्रांतिकारी हूँ

27 July, 2011

जामवंत हैं अन्ना ............

कोई आए आके मेरा अब तो नब्ज़ देखले
जो ह्रदय के घाव है मन का कब्ज देखले
आँखें तो चाहती हैं रोना आज निरंतर
नेताओं के बेशर्मी बाग सब्ज देख लें
सरकार हो तुम हम भी तो हैं आम आदमी
किस मिट्टी के बने हो हैं न आँखों में नमी
इतना न झुकाओ की टूट जाए ये कमर
फूलों का गला घोटता नहीं कहीं भ्रमर
एक अन्ना ने जो किया स्मरण वो रहे
हमारे भी धमनियों में वही रक्त बह रहे
सोंचो अगर आ जाएँ हजारों में हजारे
लंगोटी सम्हाल कैसे भाग पाओगे प्यारे
घमंड तो रावण का भी चूर हुआ था
हनुमान अकेले से मजबूर हुआ था
भूलना नहीं हमार जामवंत हैं अन्ना
आये है हम बदलने इतिहास का पन्ना .

25 March, 2010

Scientoonics: Communicating science through cartoons

Communicating science in the language of the masses has been a challenging endeavor for science communicators. It becomes difficult to conceptualize the complexity that is inherent in science down to a medium where the content makes an

http://www.youthkiawaaz.com/2010/03/scientoonics-communicating-science-through-cartoons/

29 September, 2009

कुछ बात अधूरी .......................



कुछ बात अधूरी
जो रह गयी है मन में
कागज़ का ले सहारा
जीवंत हो गयी है
रुक रुक के जो चलती थी
कागज़ पे ये कलम जो
खुश हो के आज बिलकुल स्वछंद हो गयी है
जो भाव छिपे अंदर
मन के अँधेरे में
एक दीप के जलने से
स्वतंत्र हो गयी  हैं
परिधि न कोई सीमा
न कोई अब बंधन है
सागर भी है अब अपना
अपनी ही ये गगन है
मन आज आजादी के धुन पे थीरकती है
मन अपनी ही ख़ुशी में आज आप ही मगन है

28 September, 2009

आवाज़ मेरे अंदर की कहीं शोर न बने



आवाज़ मेरे अंदर की कहीं शोर न बने
दृढ है जो मनोबल वो कमजोर न बने
आकाश में होती टिकी नज़रें जो मेरी हैं
देखना प्रभु कहीं तेरी हीं चितचोर न बने
मालूम है मंदिर में नहीं
मस्जीद में नहीं हो
तुम प्रेम के एहसास में
पर हठ जिद्द में नहीं हो 
चन्दन में नहीं हो तुम मुंडन में नहीं हो  
हर बात के हामी में खंडन में नहीं हो
तुम हो ते हो  सहज में और सरल में
तुम ही तो होते हो कर्मों के हर फल में
तुम आँखों में बसते हो रहते हो हर जगह
लड़ते हैं ये पुतले फिर यूँ हीं बे वजह
आना तुम्हारा जीवन में   बसंत की तरह
प्रारंभ  नयी हो जहाँ वो अंत की तरह
जीवन बना  दो मेरी समदर्शी हो जाऊं 
सराबोर आनंद से मैं  संत की तरह ..........          

10 September, 2009

आकाश में पदचिन्ह .........

आकाश में पदचिन्ह

कहाँ छोड़ती है पंछी

और कहाँ होती कोई

मोड़ और चौराहे

उड़ता हूँ उन्मुक्त उसी

गगन में मैं भी

स्वीकार करता सब कुछ

बाँहों को मैं फैलाये

मेरा भी कोई रस्ता

जाना पहचाना है

आकाश के परे आकाश को पाना है ...................




09 September, 2009

अन्धकार से लड़ना नहीं

अन्धकार से लड़ना नहीं
एक दीप जलना है
मन के आँगन में जो कैक्टस पनप गए हैं
वहां पे जाके आज तुलसी को लगाना है
जो दौड़ है ये अँधा और छोर नहीं कोई
काटोगे फसल तुम वो जो बीज तुमने बोई
फिर हल्ला हंगामा क्यूँ
फिर रोज़ ये ड्रामा क्यूँ
की दुनिया हरामी है और लोग हैं कमीने
सच तो है बस इतना मरने में तुम उलझे हो
ये जदोजहद में आया नहीं तुम्हे जीने.

23 May, 2009

डर के बाद जीत है


उस राह पर मुझे जाना है


जिसपर जाने से डरते हैं लोग


मुझे अच्छा लगता है जब मेरे


आत्मविश्वास से टूटते हैं धारणाएं


और फिर जुड़ती है संघर्ष की अनेक कथाएँ जीवन से मेरी

मेरे इन कथाओं में मेरी सफलता की बात है

पर हर अन्धकार को चीरती सूर्योदय का प्रकाश है

मेरे कहानी में अन्धकार मेरे मन की मनमानी है

और सूर्योदय मेरे आत्मविश्वास की निशानी है

हर डर के बाद जीत है

हार मेरे स्वाभाव से भली भाति परिचित है .....................

17 March, 2009

GOD it was u I was not..........



why am i so happy today I am not aware


the only thing the joy i have i wanted u to share


i wanted world to see the bliss and radiance on my face


i wanted friends to love me for i am out of rat race


i was totally upset whenever something went bad


now i realized the oppurtunity behind every trouble i get


i had some friends who laughed at me and made me feel alone


throat dried deep and i used to live with heavy tone


now i realized the benifits of isolation that i got


at times when it was going tough GOD it was u I was not..........


05 March, 2009

मेरे जीवन में जो भी है वो मुझे प्यारा है ................


मेरे जीवन में जो भी है वो मुझे प्यारा है

मेरे रिश्तों की kashti का तू sahara hai

तू जो है to क्या phikr है tufano का

तेरे baahon में to majdhaar भी किनारा है

मैं यही सोचता मन ही मन में

काश कोई आए ऐसा भी मेरे जीवन में

जिसके आने से duniya मेरी badal जाए

hakikat के jamin पर मेरे sapne आए

sapne जो adhure unhe vistaar मिले

मेरे hisse का जो है प्यार मुझे प्यार मिले .....................






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