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जब गिरती है कोई गगन चुम्बी इमारत तब साथ गिरते हैं आस पास के मकान भी और धुल चाटती है ऐसे में ईमानदारी की झोपड़ी इसे सामूहिक निषेध कहते हैं इसी...
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कुछ यादों को समेटे कुछ सपनो को संजोये मैंने असंख्य बीज़ अपने ह्रदय में बोये हर शख़्स जो मिला मुझे जीवन के पगडण्डी पर कु...
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शिव है या फिर है शव मौन या सुखद कलरव उस चैतन्य का मैं पुजारी हूँ मिला जो जीवन आभारी हूँ की आभास उसका मुझे कण कण में है उसकी छाप मेरे हर वचन ...