31 July, 2015
29 July, 2015
24 July, 2015
निज यात्रा मेरी ये ईश्वर की कारवां है .................
आवाज़ देने पर भी आया नहीं जो कोई
चलता रहा मैं युहीं अंजान उन राहों पर
जो धुप की तपिश थी और छांव की शीतलता
मलता रहा मैं उनको, राह की घावों पर
कभी मौन के उत्सव में, कभी शोर में अकेला
कभी मखमली घांसों पर कभी धुल से मैं खेला
पर उसकी योजना का अभिव्यक्ति मात्र मैं था
जो चल रहा था मेरे हमसफ़र की भाँती
मेरे विचार थोथे, की अकेला मैं हूँ
वो था हमेशा युहीं जैसे दीया और बाती
ऊर्जा का श्रोत वो तो संघर्ष फिर कहाँ है
निज यात्रा मेरी ये ईश्वर की कारवां है .................
22 March, 2015
आशीर्वाद
मुझे बस तुम्हारा आशीर्वाद चाहिए
नचिकेता को यम से जो ज्ञान था मिला
मुझे तुमसे वैसा ही संवाद चाहिए
मैं न प्रह्लाद हूँ , न अर्जुन सा गुणी
न हूँ जैसे थे ज्ञानि ही नारद मुनि
है विनती अनुभव हो वो सत्य शाश्वत
स्वीकार करो मेरा तुम मौन दंडवत
19 March, 2015
डार्विन
मैंने जो दुनिया देखि , अपने आँखों से
उसमे तो डार्विन के विचार ही हावी हैं
जो कहता है की अगर तुम्हे है जीना यहाँ
तो विकल्प नहीं, संघर्ष अवस्यम्भावी है
13 March, 2015
06 March, 2015
होली
श्याम स्वेत के अलावा रंग कौन सा लिखूं
सोंचता हूँ होली पे प्रसंग कौन सा लिखूं
यादें कई कैद है ह्रदय के किसी कोने में
ख़ुशी अपार होती थी साथ सबके होने में
माँ के हाँथ उठते थे चन्दन और आशीर्वाद को
भुला नहीं सुंगंध और उन असंख्य स्वाद को
अभी भी होती होली है, वही रंग है गुलाल है
अपनों से दूर होने का मन में बड़ा मलाल है
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