Ranjeet K Mishra

Abhivyakti (Expressions)

06 July, 2010

मंगल ज्ञानानुभाव - रणजीत कुमार | हिन्दीकुंज

मंगल ज्ञानानुभाव - रणजीत कुमार हिन्दीकुंज
at July 06, 2010
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जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद।
जीवन अस्थिर अनजाने ही, हो जाता पथ पर मेल कहीं,सीमित पग डग, लम्बी मंज़िल, तय कर लेना कुछ खेल नहीं।दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते, सम्मुख चलता पथ का प्रसाद –जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद।
साँसों पर अवलम्बित काया, जब चलते-चलते चूर हुई,दो स्नेह-शब्द मिल गये, मिली नव स्फूर्ति, थकावट दूर हुई।पथ के पहचाने छूट गये, पर साथ-साथ चल रही याद –जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद।
-----------------------------------------------Shivmangal Singh 'Suman'

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